डेंगू के लिए  होम्योपैथिक दवाएं

By Dr Harsh Sharma, DHMS, BHMS

Published July 26, 2019, Last updated July 26, 2019

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Homeopathic medicines for dengue
Aedes Egypti 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डेंगू ज्वर या डेंगू बुखार बरसात के मौसम में एक चिंता का विषय बना रहता है। जैसा कि सब जानते हैं, यह मच्छर के काटने से फैलता है। आइये इस के बारे में विस्तार से जानें।

डेंगू बुखार के कारण

डेंगू बुखार उस ज्वर को कहा जाता है जो डेंगू वाइरस से होता है। डेंगू वाइरस 4 प्रकार के होते हैं – डेंगू वाइरस 1, डेंगू वाइरस 2 , डेंगू वाइरस 3, डेंगू वाइरस 4। ये चारों वाइरस एडीस इजिप्टाई ( Aedes Egypti ) नामक मच्छर के काटने से फैलता है। ये मच्छर जब किसी इंसान को काटते हैं तो इन वाइरसों को उस इंसान के खून के प्रवाह में छोड़ देते हैं। जब ये वाइरस खून में दौरा करते हैं तो उन्हें तेज़ी से बढ़ने फूलने का मौका मिल जाता है। जब इन की मात्रा खून प्रवाह में बढ़ जाती है तो ये खून में पाए जाने वाले छोटे छोटे प्लेटलेट्स नामक रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं।

डेंगू बुखार के लक्षण

  1. डेंगू बुखार का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण है शरीर में अत्यधिक दर्द।
  2. डेंगू बुखार का ज्वर या बुखार बहुत तेज़ होता है।
  3. आँखों, सर, पीठ, बाजुओं और टांगों में तीव्र दर्द महसूस होता है। यह दर्द शरीर के बहुत भीतर होता है मानो हड्डियों के बिलकुल अंदर हो रहा हो। ऐसा भयंकर दर्द होता है मानो हड्डियां टूट गई हों। इसी वजह से इसे ब्रेक बोन फीवर कहा जाता है।
  4. अक्सर अपने आप खून बहने लगता है। यह खून का स्राव त्वचा, कानों, आँखों से या मल मूत्र में भी हो सकता है।

डेंगू की रोक -थाम और डेंगू से कैसे बचें

  1. यह बहुत आवश्यक है कि हम अपने आस पास के वातावरण का ध्यान रखें और कहीं पर भी पानी इकठ्ठा न होने दें। यदि कूलरों या टायरों में या ऐसे ही किसी और जगह पर पानी इकठ्ठा हो जाता है तो वह मच्छरों के पनपने के लिए एक बढ़िया जगह बन जाती है।
  2. पूरी बाजू के कपड़े पहनना और अपने आप को अच्छे से ढक के रखना बहुत आवश्यक है और हम अक्सर ये नहीं करते हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जो हम आसानी से कर सकते हैं और अपने आप को बचा सकते हैं।
  3. मच्छरदानी लगाना और मछरों को भगाने वाले उपकरण उपयोग करना भी बहुत आवश्यक है और फायदेमंद है।

डेंगू बुखार का इलाज

जब हम डेंगू बुखार के उपचार की बात करते हैं तो कुछ चीज़ों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। हम जानते हैं कि यह एक वायरस से होने वाला बुखार है। एलोपैथिक प्रणाली में किसी भी वायरल बुखार के लिए कोई सार्थक दवा नहीं होती। इसी लिए डेंगू बुखार के भी कोई दवा नहीं है। अंततः रोगी को भगवान भरोसे ही रहना पड़ता है।

डेंगू बुखार का होम्योपैथिक उपचार

होम्योपैथी में डेंगू बुखार का अच्छा उपचार है। होम्योपैथिक दवाएं पिछले दो सौ साल से इस बुखार  के लिए प्रयोग होती आई हैं और बहुत प्रभावी भी रही हैं। इन का प्रयोग केवल भारत में ही नहीं परन्तु विश्व भर में होता रहा है। इस की उपयोगिता का कारण यह है कि होम्योपैथिक दवाएं किसी एक वाइरस को मारने की कोशिश नहीं करती हैं। ये दवाएं मनुष्य की रक्षा प्रणाली को सशक्त करती हैं। इससे वह रक्षा प्रणाली स्वयं ही अपना काम बखूबी करने लगती है। कुदरत ने मनुष्य को एक बहुत ही उत्तम रक्षा प्रणाली प्रदान की है जो कि उस के शरीर की बीमारियों से रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है। किसी समय इस रक्षा प्रणाली को कई बार थोड़ा सा सहारा देना आवश्यक हो जाता है और यही काम ये होम्योपैथिक दवाएं करती हैं।

डेंगू के लिए  होम्योपैथिक दवाएं

अपने अनुभव के आधार पर मैं यहां डेंगू के लिए 5 सर्वोत्तम होम्योपैथिक दवाएं दे रहा हूँ। ये पांचों दवाएं डेंगू के उपचार के लिए बहुत ही प्रभावकारी पाई गई हैं।

  1. यूपाटोरियम परफोलिएटम – हड्डियों में तीव्र दर्द के साथ डेंगू के लिए

  2. ब्रायनिया – अत्यधिक प्यास के साथ होने वाले डेंगू बुखार के लिए

  3. फॉस्फोरस – खून स्राव के साथ होने वाले डेंगू के लिए

  4. रस टॉक्स – चलते समय दर्द के कम होने वाले डेंगू के लिए

  5. करिका पपाया – डेंगू में कम हुए प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए

यहां यह बताना आवश्यक है कि केवल ये पाँच दवाएं ही ऐसी नहीं हैं जो डेंगू के लिए प्रभावकारी हैं। इन दवाओं से विभिन्न कई और दवाएं हैं जो बहुत उपयुक्त हैं। यह हर रोगी के लक्षणों के ऊपर निर्भर करता है कि उसे कौन सी दवा अधिक उपयुक्त रहेगी।

1. यूपाटोरियम परफोलिएटम – हड्डियों में तीव्र दर्द के साथ डेंगू के लिए

यूपाटोरियम परफोलीएटम डेंगू के लिए सबसे उपयुक्त दवा है क्यूंकि इस के लक्षण डेंगू के लक्षणों से पूरी तरह मिलते हैं। इसी वजह से इस दवा को ‘बोन सेट’ भी कहा जाता है। यही कारण है कि इस दवा के प्रयोग से डेंगू की तीव्र दर्दों में आराम मिलता है। यह दर्द बाजुओं और टांगों की मांसपेशियों में अधिकतर होता है और तेज़ बुखार के साथ होता है। सर में टीस मारने वाला दर्द होता है। सर के ऊपरी तथा पिछले भाग में अधिक दर्द होता है। आँखों में भी थकान महसूस होती है और दर्द भी होता है।

2. ब्रायनिया – अत्यधिक प्यास के साथ होने वाले डेंगू बुखार के लिए

इस दवा में भी तीव्र ज्वर के साथ बाजुओं, टांगों तथा पीठ में दर्द  रहता है। इस में दर्द इस प्रकार से होता है मानो कोई तीखी चीज़ की चुभन हो। इस दवा के महत्वपूर्ण लक्षण हैं कि रोगी को प्यास बहुत अधिक मात्रा में लगती है और हर प्रकार का दर्द चलने फिरने से और हिलने डुलने से भी बढ़ता है। बिस्तर में करवट बदलने पर भी दर्द बढ़ जाती है। आराम करते रहने से ही दर्द सहनीय होती है। इसी वजह से रोगी बिलकुल भी हिलना डुलना या चलना फिरना नहीं चाहता है। मुंह तथा जीभ सूख जाते हैं और अत्यधिक प्यास लगती है। प्यास तो इतनी अधिक होती है की रोगी हर समय पानी ही पीता रहता है। मुँह का स्वाद कड़वा रहता है।

3. फॉस्फोरस – खून स्राव के साथ होने वाले डेंगू के लिए

यह दवा खून के स्राव के साथ होने वाले डेंगू के लिए सर्वोत्तम दवा है। शरीर के किसी भी भाग अंग से खून का स्राव अपने आप ही आरम्भ हो जाता है। हाथों, पैरों में जलन तथा सुन्नपन होता है। बहुत अधिक प्यास लगती है और हर समय ठंडा पानी पीने का दिल करता है। यहां तक की बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने का मन करता रहता है। भूख भी अधिक लगती है।

4. रस टॉक्स – चलते समय दर्द के कम होने वाले डेंगू के लिए

रस टॉक्स डेंगू के लिए एक बेहतरीन दवा है जब शरीर में होने  दर्द चलने फिरने से थोड़ा कम महसूस होता हो। बैठने और लेटने पर यह दर्द बढ़ता है और थोड़ा चलने फिरने से यह दर्द सहनीय हो जाता है। इस लिए रोगी लगातार हिलता डुलता रहता है और एक जगह टिक नहीं पाता है। जीभ पर एक सफेद पर्त सी चढ़ जाती है और जीभ के आगे वाले भाग पर एक लाल सा त्रिकोण बन जाता है।

5. करिका पपाया – डेंगू में कम हुए प्लेटलेट्स को बढ़ाने के लिए

करिका पपाया एक होम्योपैथिक दवा है जो हमें पपीते के फल से मिलती है। यह एक साधारणतः पाया जाने वाला फल है और इस के बीजों से हमें यह दवा मिलती है। यह गिरते हुए प्लेटलेट्स की गिनती को जल्द बढ़ा देती है। मैंने इसे अनेक रोगियों पर प्रयोग किया है और बहुत ही प्रभावी पाया है।

N.B Homeopathic medicines are very safe and do not have any side effects when taken under the supervision of an expert homeopathic doctor.

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